परिक्रमा- जुगल स्वरूप रूप छवि छाजे | Jugal Swaroop roop chhavi chhaje
जुगल स्वरूप रूप छवि छाजे, सिंहासन के ऊपर विराजे ॥१॥
नाचत देत फिर आवत फेरी, हंसी हंसी लालन मुखतन हेरी ॥२॥
गावत गीत बजावत बाजे, जमुना त्रट पंखी धुनि गाजे ॥३॥
फूले फूल फूल लई आवें, गुहि गुहि हार पिया जी को पहिरावें ॥४॥
देत परिकरमा कर्म सब छूटे, यह सुख पंचम निसदिन लूटे ॥५॥
