परिक्रमा- धाम धनी श्री राज हमारे
धाम धनी श्री राज हमारे, परम निधान परम रूप प्यारे ॥१॥
महाराज मंगल रूप राजे, श्याम श्यामा जी दोऊ अनूप विराजे ॥२॥
पूर्ण अक्षर पद से न्यारे, सोई जियावर धनी जी हमारे ॥३॥
प्रगटे पिया निज अद्भुत सोई, उपमा पार पावे नहिं कोई ॥४॥
परमानन्द जोड़ी सुखकारी, अंगना पिया पर वारी वारी वारी ॥५॥
