परिक्रमा- परम सुभग आनन्द गुण गाइए
परम सुभग आनन्द गुण गाइए, नवल किशोर निरखि सुख पाइये ॥१॥
धाम श्याम जिया मंगलकारी, संग श्यामा जी दुलहिन पिया प्यारी ॥२॥
कुंज निकुंज मध्य क्रीड़त कोहे, ललित मनोहर सुंदर सोहे ॥३॥
करत केलि यमुना तट नेरे, परम विचित्र जियावर मेरे ॥४॥
निज है स्वरूप रूप पिया राजे, श्री महामति मदन कोटि छवि लाजे ॥५॥
