परिक्रमा- धाम श्याम श्यामा संग प्यारी
धाम श्याम श्यामा संग प्यारी, ब्रह्मानंद लीला निज न्यारी ॥१॥
सात घाट यमुना जल राजे, झीलत युगल किशोर विराजे ॥२॥
सघन कुंज मध्य चात्रिक बोलें, क्रीड़त लाल लाडिली डोलें ॥३॥
ताल पाल मध्य मोहोल सुहायें, खेलन प्यारो प्यारी आवें ॥४॥
लीला नित्य विहार स्वरूप पर, भई श्री महामति कुरबान निरखि छवि ॥५॥
