परिक्रमा- मूल स्वरूप किशोर किशोरी
मूल स्वरूप किशोर किशोरी, निरखि सखी सच्चिदानन्द जोरी ॥१॥
भोम तले की निरख छवि न्यारी, सोहे सिंहासन प्यारो प्यारी ॥२॥
श्वेत सेंदुर केसर आसमानी, श्याम नीलो पीलो वस्तर जाम ॥३॥
देखत खेल सनमुख सखी सारी, निरखि सिनगार शोभा अति भारी ॥४॥
ब्रह्मानंद लीला निज न्यारी, निरखि श्री महामति नवरंग वारी ॥५॥
