पौढ़ावनी- मदन मोहन श्याम
मदन मोहन श्याम, पौढ़ो पिया मदन मोहन श्याम । आनन्द होय चरणारबिंद भजो, सकल पूरण काम ॥१॥
अष्ट सिद्धि नव निध द्वारे, राज भोग विश्राम । उमापति शुकदेव नारद, रटत निस दिन नाम ॥२॥
सकल कला प्रवीण मोहन, संग श्यामा जी श्याम । कहत कृष्ण सखी गिरधर, अखंड है परमधाम ॥३॥
