पौढ़ावनी- सोय रहे श्याम सखियन संग मोहोलन
सोय रहे श्याम सखियन संग मोहोलन ।
आये सखियां सब झरोखों उतरी, छठी भोम आये सुखपालन ॥१॥
विदा किये धनी खूब खुसाली, ले सिर हुकम चले सब बंगलन ॥२॥
पशु पंखी आज्ञा सब पाये, आये सबहिं जहां बन सघनन ॥३॥
युगल स्वरूप सुख सेज शयन कर, नख सिख शोभा लसे अंग गहनन ॥४॥
अति सों प्रेम प्रीति सों प्यारी, गहि दोऊ हाथ लगाये हिय चरणन ॥५॥
प्राग सखी बलि जाय चरण की, लीला होत जहां तीन पोहोरन ॥६॥
