प्रभाती- उठो रे प्यारे पिया नवल विलासी
उठो रे प्यारे पिया नवल विलासी, प्रातः भयो चितरूप प्रकासी ॥टेक॥
क्रीड़ा रस रजनी रूप राजे, प्रातः भयो सुख नवले साजे । निद्रा मद में आनन्द तरंगी, लोचन रंग रंगीले रंगी ॥१॥
इच्छा रूपी लीला रंग भीनी, नित्य नवतन रस बस जो कीन्ही । निरखि मंगल मुख सुखदाई, उठो रे जीवन प्यारी उठावन आई ॥२॥
उठि बैठे दोऊ सेज्या सुखदाई, अलबेली जीवन मन भाई । श्री सुन्दर श्री इन्द्रावती जोड़ी, निरख नागर नवरंग गोड़ी ॥३॥
