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सद्गुरु स्तुति

जय जय सद्गुरु आरती तेरी, निर्मल दृष्टि करी जिन मेरी ॥१॥

तारतम ज्ञान हाथ कर लीन्हों, खीर नीर को निर्णय कीन्हों ॥२॥

पिंड ब्रह्माण्ड लखाये दोई, पूरण ब्रह्म बिन और नहीं कोई ॥३॥

मोह तत्व उपज्यो है सोई, जो उपज्यो सो तो रह्यो न कोई ॥४॥

बैठे सिंहासन श्री युगल बिहारी, युगल बिहारी पिया नवल बिहारी । छवि निरखत श्री महामति बलिहारी ॥५॥

सेवा पूजा - विषय सूची