सद्गुरु वन्दना प्रातःकाल
वन्दौ सद्गुरु चरण को, करूं सो प्रेम प्रणाम । अशुभ हरन मंगल करन, श्री देवचन्द्र जी नाम ॥
श्री प्राणनाथ निजमूल पति, श्री मेहेराज सुनाम । तेज कुंवरी श्यामा युगल को, पल पल करूं प्रणाम ॥
श्री प्राणनाथ तुम सत्य हो, तुम से चलत जहाज । मैं अधीन करनी नहीं, बांह ग्रहे की लाज ॥
