Kuljam.org

विषय-सूची

संध्या आरती | Sandhyaa Aarti

कंचन थाल चहुं मुख दिवला, दीपक जोत प्रकासी । करत आरती जियावर रानी, आनन्द अंग उलासी ॥१॥

जुगल सरूप सुन्दर सुखदायक, स्याम धाम धनी सोहे । मंगल रसिक बदन की सोभा, निरखंता मन मोहे ॥२॥

सखियां निरत करें और गावें, आनन्द अखण्ड अपार । ताल मृदंग झांझ जन्त्र बाजे, सखियां बोले जै जै कार ॥३॥

बधावें मुक्ताफल सखियां, श्री जियावर स्याम सुहागी । तन मन जीव निछावर कीन्हों, श्री इन्द्रावती चरणों लागी ॥४॥

सेवा पूजा - विषय सूची