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शयन आरती

आरती करूं मारा वाला जी ने केरी, मारे हैयड़े ते हरख न माय ॥१॥

आगल ताल मृदंग झांझ जन्त्र बाजें, सखियां निरत करें और गावें ॥२॥

मारा वाला जी ने सुन्दर वदन सुहामणों, कांई शोभानो नहिं पार ॥३॥

सखियां कहे मारा वालाजी ने ऊपर, तन मन जीव करूं बलिहार ॥४॥

सुन्दर स्वरूप जुगल दोऊ ऊपर, श्री महामति जाये बलिहार ॥५॥

सेवा पूजा - विषय सूची