सिनगार आरती- सांभर सैयर मेरी बात | Singaar Aarti- Saambhar Saiyar meri baat
सांभर सैयर मेरी बात, श्री प्राणनाथ पिउ विलसिए । आपण कीजे मंगलचार, आरती उमंग भर कीजिए ॥१॥
राजित जुगल किसोर, सिंहासन कंचन मणी । अति सुन्दर कंचन थाल, दीपक जोत रजित घणी ॥२॥
श्री इन्द्रावती उछरंग, आरती करे अखंड धनी । बार हजार सखी संग, सोभा सी कहूं तेहतणी ॥३॥
बाजत ताल मृदंग, गान करें सखी सहू मली । भूखन करे झलकार, सुरता पहोंची मन रली ॥४॥
एवी आरती अखंड स्वरूप, निरखि हरखि गुण गाइये । श्री महामति युगल स्वरूप, निरखि निरखि सुख पाइये ॥५॥
