प्रातःकाल का उठापन
रैनि की उनीदी श्यामा पिउ पासे आइयां, पिउ पासे आइयां, प्रीतम पासे आइयां ॥टेक॥
नैन अरुण सोहे रति रंग भीने, पिउ प्यारी मन्द मन्द मुस्काइयां ॥१॥
अतलस गेंदुवा सेत निहाली, जाड़ो लगे पिया शाल ओढ़ाइयां । लटपटी पाग छूटे बंध सोहे, रंग सेज्या दोऊ लाल सोहाइयां ॥२॥
अंग सो अंग जोड़े दोऊ मन भाइयां, अरस परस कर कंठ लपटाइयां । महारंग रस भीने रसिक युगल पिया, निरखि निरखि सखियां सुख पाइयां ॥३॥
चन्दन की चौकी डारों बैठो प्यारे अंगना, लवंग की दातौन जल झारी भरी ल्याइयां । श्री इंद्रावती पति रूप जुगल धनी, निज नवरंग निरख निरख बलि जाइयां ॥४॥
