वधावो
धन्य घड़ी धन्य राज पधारिया, नवला नेह वधारया रे, वाला ने वधावो ॥१॥
ओचींता मारे मन्दरीये पधारिया, ते मारे मन भाव्या रे, वाला ने वधावो ॥२॥
नवुं नगर नौतनपुरी कहावे धणी, श्री देवचन्द्र जी नो वासो रे, वाला ने वधावो ॥३॥
माता नुं नाम कुंवर बाई कहावे, मत्तू मेहता घेर अवतरिया रे, वाला ने वधावो ॥४॥
पहेरो चीर चुंदड़ी रंग चोली, सिणगारो सर्व टोली रे, वाला ने वधावो ॥५॥
ठम ठम थाल भरु सग मोती हार, पहेरोने पनोती रे, वाला ने वधावो ॥६॥
उभला त्रट जमुना नी गलीये, अंगों अंग अमने मलिया रे, वाला ने वधावो ॥७॥
श्री सुन्दर श्री इन्द्रावती जीवन, नवरंगना पिउ रसिया रे, वाला ने वधावो ॥८॥
