वन्दना- पूर्ण ब्रह्म ब्रह्म से न्यारे | Poorn Brahm Brahm se nyare
पूर्ण ब्रह्म ब्रह्म से न्यारे, आनंद अखंड अपारे । शिव सनकादि आदि के इंछित, शेष न पावत पारे ॥१॥
अगम जानि के निगम कहाये, खोजि खोजि पचिहारे । जानि के मूल धनी अंगना अपनी, सो घर आये हमारे ॥२॥
श्री ठकुराणी जी सखियन सुधां, लीन्हे संग पधारे । त्रिगुन फांस के फंद पड़े थे, सो फंदा निरवारे ॥३॥
वारी वारी जाऊं मैं अपने पिया पर, शोभा मुखहुं न आवे । सिंहासन आसन बैठारे, छत्रसाल गुण गावे ॥४॥
