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विषय-सूची

चित्त

चित्त अन्तःकरण का एक सूक्ष्म अंग है ।

चित्त को स्मृति-कोष भी कहा जा सकता है । जीव द्वारा किए गए कर्मों के फलस्वरूप संस्कार बनते हैं, जो चित्त में एकत्रित होते रहते हैं । जब तक चित्त के संस्कार समाप्त नहीं हो जाते, तब तक जीव को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति नहीं मिल सकती । पाप और पुण्य दोनों प्रकार के कर्म जीव को आवागमन के चक्र में बांधे रखते हैं, इसलिए गीता में निष्काम कर्म की प्रशंसा की गई है जिससे संस्कार नहीं बनते ।