परमहंस जीवन मस्तान | Jeevan Mastaan
जीवन मस्तान जी का जन्म अठारहवीं शताब्दी में हुआ था । उनका निवास सुल्तानगंज, मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) में था । कोई उन्हें जन्म से हिन्दू, तो कोई मुस्लिम मानता है । वे बहुत भ्रमणशील स्वभाव के व्यक्ति थे । सम्भव है कि सदैव भक्ति की मस्ती में रहने के कारण, उन्होंने अपने नाम में मस्तान जोड़ लिया हो ।
ऐसी मान्यता है कि जीवन मस्तान मलिहाबाद वाले श्री मकुन्द दास की परम्परा के परमहंस थे । एक बार वे भ्रमण करते हुए दर्शन हेतु श्री पद्मावती पुरी, पन्ना पहुंच गए । उनकी अटपटी वेशभूषा देखकर सुन्दरसाथ ने उन्हें मन्दिर में प्रवेश नहीं करने दिया । इस बात से वे बहुत दुःखी हुए और तीन दिन तक द्वार पर खड़े रहे । तीसरे दिन गुम्मट मन्दिर के कलश पर स्थित पंजा हिलने लगा । तब सुन्दरसाथ ने जीवन मस्तान को आदर से मन्दिर में प्रवेश दिया ।
श्री जीवन मस्तान पंचकों के माध्यम से अपने विचार व्यक्त करते थे । उनकी पंचकों की पुस्तक भी छप चुकी है । श्री प्राणनाथ मन्दिर, पन्ना के विषय में लिखी गई एक पंचक की कुछ पंक्तियां देखने योग्य हैं-
परना परमधाम देख, इस्क आराम देख, करिके प्रणाम देख, सकल दुख भाजे हैं । कहत है मस्तान, जिसे लागी इस्क तान, रूह देखिए दीदार, श्री प्राणनाथ विराजे हैं ।।
