मन
मन अन्तःकरण का एक सूक्ष्म अंग है ।
मन का कार्य है संकल्प करना । संकल्प के माध्यम से मन शरीर को संचालित करता है । समस्त इन्द्रियां मन के अधीन हैं ।
मन और प्राण आपस में जुड़े होते हैं । मन अत्यन्त सूक्ष्म होता है । बाह्य दृष्टि से उसे देखना सम्भव नहीं है । मन की तुलना में प्राण स्थूल होता है । अतः प्राणों को नियन्त्रित करके मन पर नियन्त्रण पाया जा सकता है । इसलिए ध्यान करने से पहले मन को एकाग्र करने के लिए साधक प्राणायाम का अभ्यास करते हैं ।
जहां तक बुद्धि, तुरीय (समाधि अवस्था), दृष्टि, श्रवण तथा मन की पहुंच है और जो वचनों में वर्णित किया जा सकता है, यह सब उत्पन्न होकर नष्ट होने वाला है अर्थात् नश्वर है ।1
(1) कलस हिन्दुस्तानी 2/13
