प्रमाण | Pramaan
प्रमाण का अर्थ होता है सबूत । दर्शन में प्रमाण का बहुत महत्व है । बिना प्रमाण के किसी भी तर्क को सिद्ध नहीं किया जा सकता ।
प्रमाण के प्रकार
न्याय दर्शन में चार प्रमाणों का वर्णन है-
- प्रत्यक्ष
- अनुमान
- उपमान
- शब्द
वेदान्त में छह प्रमाण माने गए हैं-
- मनन
- चिन्तन
- विवेचन
- सुनना
- देखना
- शब्द
क्या परब्रह्म की पहचान छह प्रमाणों से की जा सकती है ?
मन, चित्त, बुद्धि, श्रवण, दृष्टि और शब्द में से कोई भी परब्रह्म तक नहीं पहुंच सकता । जब परब्रह्म छह प्रमाणों से परे हैं, तो उनके विषय में दृढ़ता से कैसे कहा जाए ?1
(1) कलस हिन्दुस्तानी 2/15
