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विषय-सूची

तृष्णा

तृष्णा का अर्थ होता है सांसारिक इच्छा । इसे कामना, वासना या हिरस भी कहते हैं ।

यहां छूत का कोई ऐसा रोग (तृष्णा) रचा गया है कि संसार को देखते ही दुःख में फंस जाते हैं और किसी तरह से भी छूट नहीं पाते । यह संसार देखने योग्य नहीं है ।1

तृष्णा के प्रकार

शास्त्रों में तीन प्रकार की तृष्णा का वर्णन है-

  1. वित्तेषणा - धन का लोभ
  2. दारेषणा या पुत्रेषणा - स्त्री, पुत्र, सगे-सम्बन्धियों, शिष्यों, भक्तों की तृष्णा
  3. लोकेषणा - पद या प्रतिष्ठा की इच्छा


(1) कलस हिन्दुस्तानी 1/24