श्री कयामतनामा
श्री कुलजम सरूप की चौदह किताबों में से एक कयामतनामा है, जिसके दो भाग हैं- छोटा और बड़ा । यह ज्ञान श्री जी साहिब प्राणनाथ जी के मुख से प्रकट हुआ और इसकी शैली चौपाइयों के रूप में है । छोटा कयामतनामा का प्रकटन पन्ना में हुआ, जबकि बड़ा कयामतनामा का प्रकटन चित्रकूट में हुआ ।
छोटा कयामतनामा विषय सूची-
बड़ा कयामतनामा विषय सूची-
- खास उमत सों कहियो जाई
- एक तो कहे अल्ला कलाम
- लिख्या चौथे सिपारे
- तीसरे सिपारे बड़ा जहूर
- लिख्या मांहें नामें नूर
- हो सैयां फुरमान ल्याए हम
- हुइयां सोभा तेरी सोहागनियां
- लिख्या सिपारे आखिरे सात दसमी सूरत
- लिख्या सिपारे सूरतों
- चौथे सिपारे में लिखी
- ए रोज नाहीं खिलाफ
- कुरान तफसीर जो हुसेनी
- ए सिपारे पेहेले की कही
- औलाद याकूब कह्या इस्हाक
- छिपके साहेब कीजे याद
- ए जंजीर सिपारे सोलमें मांहें
- कह्या आम सिपारे मांहें
- सिपारा आम आधा पूरन
- तीन दिन कहे जो बुजरक
- जिनको कयामत की है सक (तारीख नामा)
- लिख्या आम सिपारे सूरत
- महंमदें जाहेर करी दावत (अमेतसालून)
- दिन कयामत के पूरे कहे
- नौमी आगे अरफा ईद कही
