श्री खटरूती
श्री कुलजम सरूप के चौदह ग्रन्थों में से एक खटरूती है । यह ज्ञान परब्रह्म के आवेश स्वरूप श्री प्राणनाथ जी के मुख से जामनगर में प्रकट हुआ और इसकी शैली चौपाइयों के रूप में है ।
विषय सूची-
- मारा वालाजी रे वल्लभ (वरखा रूत)
- सरदनी रूत रे सोहामणी रलियामणी (सरद रूत)
- रूतने आवी रे वालैया हेमनी (हेमंत रूत)
- सीत रूत पिउजी तम विना (सीत रूत)
- रूतडी आवी रे मारा वाला (रूत वसंतनी)
- वालाजी विना रूत ग्रीखम हो (गरमी रूत)
- सुणोने वालैया (अधिक मास)
- वचन वालाजीना वालेरा रे लागे (खटरूती का कलस)
- पिउजी तमे सरदनी रूते रे सिधाव्या (अथ बारे मास - सरद रूत)
- वाला मारा हेमाले थी हेमरूत हाली (हेमंत रूत)
- वाला रूतडी आवी रे सीतलडी लूखी (सीत रूत)
- वाला मारा आवी रे रूतडी वसंत (वसंत रूत)
- वाला मारा आवी रे रूतडी ग्रीखम (ग्रीखम रूत)
- पावसियो आव्यो रे वरखा रूत मांहें (वरखा रूत)
- वाला मारा खटरूतना बारे मास (बारहमासी का कलस)
