श्री खिलवत
श्री कुलजम सरूप के चौदह ग्रन्थों में से एक खिलवत है । यह ज्ञान परब्रह्म के आवेश स्वरूप श्री प्राणनाथ जी के मुख से पन्ना में प्रकट हुआ और इसकी शैली चौपाइयों के रूप में है ।
विषय सूची-
- ऐसा खेल देखाइया
- हम लिए कौल खुदाए के (मैं खुदी काढ़े का इलाज)
- मैं बिन मैं मरे नही
- ज्यों जानो त्यों रखो
- यों कई देखाई माया (रूहों को कुदरत देखाई हक ने)
- गैब बातें मेहेबूब की (पंच रोशनी का मंगला चरन)
- ए इलम इन वाहेदत का (बेसकी का प्रकरण)
- साकी पिलावे सराब (सराब सुख लज्जत)
- देख तूं निसबत अपनी (निसबत का प्रकरण)
- रे रूह करे ना कछू अपनी (कलस पंच रोसनी का)
- खिलवत हक रूहन की (हक रूहन की खिलवत)
- हाए हाए क्यों न सुनो रूहें अर्स की (सूरत हक इस्क के मगज का बेसक)
- ल्याओ बुलाए तुम रूहअल्ला (बुलाए ल्याओ तुम रूहअल्ला)
- रूहअल्ला सुभाने भेजिया (सूरत अर्स अजीम की बातूनी रोसनी)
- आसिक मेरा नाम
- मेहेर हुई महंमद पर
