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विषय-सूची

श्री किरन्तन

श्री कुलजम सरूप के चौदह ग्रन्थों में से एक किरन्तन है । यह ज्ञान परब्रह्म के आवेश स्वरूप श्री प्राणनाथ जी के मुख से अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुआ और इसकी शैली चौपाइयों के रूप में है ।


विषय सूची-

  1. पेहेले आप पेहेचानो रे साधो
  2. बिंद में सिंध समाया रे साधो
  3. साधो भाई चीन्हो सब्द कोई चीन्हो
  4. साधो हम देख्या बड़ा तमासा
  5. सुनो रे सत के बनजारे
  6. भाई रे बेहद के बनजारे
  7. हो मेरी वासना तुम चलो अगम के पार
  8. हो भाई मेरे वैष्णव कहिये वाको
  9. कहा भयो जो मुखथें कह्यो
  10. सुनो भाई संतो कहूं रे महंतो
  11. रे हूं नाहीं रे हूं नाहीं सिध साध संत री भगत
  12. वचन विचारो रे मीठड़ी
  13. आज सांच केहेना सो तो काहू ना रुचे
  14. धनी न जाए किनको धूत्यो
  15. पतित सिरोमन यों कहे
  16. दुख रे प्यारो मेरे प्रान को
  17. सखी री आतम रोग बुरो लग्यो
  18. मैं तो बिगड़या विश्व थें बिछुरया
  19. तुम समझ के संगत कीजो रे बाबा
  20. साधो या जुग की ए बुध
  21. चल्यो जुग जाए री सुध बिना
  22. रे हो दुनियां बावरी
  23. रे हो दुनियां को तूं कहा पुकारे
  24. रे मन भूल ना महामत
  25. रस मगन भई सो क्या गावे
  26. खोज बड़ी संसार रे तुम खोजो साधो
  27. कहो कहो जी ठौर नेहेचल (किरंतन वेदांत के)
  28. मैं पूछों पांड़े तुम को
  29. संत जी सुनियो रे
  30. चीन्हे क्यों कर ब्रह्म को
  31. कलि में देख्या ग्यान अचंभा
  32. भाई रे ब्रह्मग्यानी ब्रह्म देखलाओ
  33. रे जीव जी जिन करो यासों नेहड़ा
  34. रे जीव जी तुमें लागी दाझ मुझ बिछड़ते (अब देह की तरफ का जवाब)
  35. वालो विरह रस भीनों रंग विरहमां रमाड़तो
  36. हांरे वाला रल झलावियो रामतें रोवरावियो
  37. हांरे वाला बंध पड़या बल हरया तारे फंदड़े
  38. केम रे झंपाए अंग ए रे झालाओ
  39. हांरे वाला कांरे आप्या दुख अमने अनघटतां
  40. हांरे वाला अगिन उठे अंग ए रे अमारड़े
  41. करनी तुमारी मेरी मैं तौली
  42. मीठडा मीठा रे
  43. विनता विनवे रे
  44. म्हारा वस कीधल वाला रे
  45. आवोजी वाला म्हारे घेर
  46. प्रीत प्रगट केम कीजिए
  47. खोज थके सब खेल खसमरी
  48. खिन एक लेहु लटक भंजाए
  49. बाई रे वात अमारी हवे कोण सुणें
  50. बाई रे गेहेलो वालो गेहेली वात करे रे
  51. आज वधाई वृज घर घर
  52. सतगुर मेरा स्याम जी
  53. धनी जी ध्यान तुमारे रे
  54. हो साथ जी वेगे न वेगे
  55. आए आगम बानी इत मिली
  56. भई नई रे नवों खंडों आरती (आरती)
  57. कृपा निध सुंदरवर स्यामा (भोग)
  58. राजा ने मलो रे राणें राए तणों
  59. ऐसा समे जान आए बुध जी
  60. कुली बल देखो रे
  61. साहेब तेरी साहेबी भारी
  62. मांगत हों मेरे दुलहा
  63. जिन सुध सेवा की नहीं
  64. तमें वाणी विचारी न चाल्या रे वैष्णवो
  65. ए माया आद अनाद की
  66. सैयां मेरी सुध लीजियो
  67. वाटडी विसमी रे साथीडा वेहद तणी
  68. अटकलें ए केम पांमिए
  69. सुन्य मण्डल सुध जो जो मारा संमंधी
  70. हवे वासना हसे जे वेहदनी (मूलगी चाल)
  71. लाडलियां लाहूत की (किरंतन आखिर के)
  72. जंजीरां मुसाफ की
  73. जो कोई सास्त्र संसार में (सास्त्रों की प्रनालिका)
  74. भवजल चौदे भवन
  75. मेरे धनी धाम के दुलहा
  76. निज नाम सोई जाहेर हुआ
  77. वतन बिसारिया रे
  78. सखी री जान बूझ क्यों खोइए
  79. साथजी पेहेचानियो
  80. मेरे मीठे बोले साथ जी
  81. सुन्दर साथजी ए गुन देखो रे
  82. सखीरी मेहेर बड़ी मेहेबूब की
  83. धंन धंन ए दिन साथ आनंद आयो
  84. धंन धंन सखी मेरे सोई रे दिन
  85. ए जो कही जागन (तीन विध का चलना)
  86. साथ जी जागिए
  87. आग परो तिन कायरों
  88. सैयां हम धाम चले
  89. चलो चलो रे साथ
  90. साथ जी सोभा देखिए
  91. आगूं आसिक ऐसे कहे
  92. अब हम धाम चलत हैं
  93. अब हम चले धाम को
  94. सुनो साथजी सिरदारो
  95. सोई सोहागिन धाम में
  96. तो भी घाव न लग्या रे कलेजे
  97. इन धनी के बान मोको ना लगे
  98. तो भी चोट न लगी रे आतम को
  99. धिक धिक पड़ो मेरी बुध को
  100. धनी एते गुन तेरे देख के
  101. साथ जी सुनो सिरदारो
  102. बुजरकी मारे रे साथजी
  103. जो तूं चाहे प्रतिष्ठा
  104. कयामत आई रे साथजी
  105. मैं पूछत हों ब्रह्मसृष्ट को
  106. ए सुच कैसे होवहीं
  107. झूठ सब्द ब्रह्मांड में
  108. फुरमान मेरे मेहेबूब का
  109. मासूक मेरे रूह चाहे सिफत करूं
  110. कारी कामरी रे
  111. फरेबी लिए जाए
  112. सरूप सुन्दर सनकूल सकोमल
  113. चतुर चौकस चेतन अति चोपसों
  114. नूर को रूप सरूप अनूप है
  115. हुब मेहेबूब की आसिक प्यास ले
  116. नूर नगन चेतन भूखन रचे
  117. मिली मासूक के मोहोल में माननी
  118. मोमिन लिखे मोमिन को
  119. वारी रे वारी मेरे प्यारे
  120. साथजी ऐसी मैं तुमारी गुन्हेगार
  121. सिफत तो सारी सब्द में
  122. ब्रह्मसृष्टि बीच धाम के
  123. स्यामाजी स्याम के संग
  124. हम चडी सखी संग रे
  125. वृथा कां निगमो रे
  126. तमें जो जो रे मारा साध संघाती (किरंतन पुराने)
  127. पर न आवे तोले एकने
  128. हांरे मारा साध कुलीना सांभलो
  129. हांरे मारा साध कुली ना जो जो
  130. वाटडी विस्मी गाडी भार भरी (धोरीडा मा मूके तारी धूसरी)
  131. आवो अवसर केम भूलिए
  132. अंदर नाहीं निरमल
  133. विसराई गिंन्यो वंजे (किरंतन हुकाको सिंधी भाखा में)

इसी सन्दर्भ में देखें-