श्री मारफत सागर
श्री कुलजम सरूप की चौदह किताबों में से एक मारफत सागर है । यह ज्ञान श्री जी साहिब प्राणनाथ जी के मुख से पन्ना में प्रकट हुआ और इसकी शैली चौपाइयों के रूप में है ।
विषय सूची-
- पेहेले कहूं अव्वल की (खिलवत की रद बदलें)
- तिस वास्ते दुनी पैदा करी (इलम लदुन्नी नुकता तारतम)
- फिरके नारी तो कहे (बाब फिरकों का)
- जो लों पट न खोल्या बका का (बाब तीनों गिरो के फैल हाल मकान)
- तीनों फरिस्तों का बेवरा (बाब तीनों फरिस्तों का बयान)
- जैसा अमल रात का (बाब कजा का)
- मांगी रसूलें रेहेमत (बाब फितने का)
- आए लिखे बड़ी दरगाह से (बाब चारों निसान का - दाभतूलअर्ज का निसान)
- कह्या दज्जाल अस्वार गधे पर (दज्जाल का निसान)
- कह्या मगरब ऊगसी सूरज (सूरज मगरब का निसान)
- कहे आजूज माजूज (आजूज माजूज का निसान)
- चारों निसान ए कहे (बाब तीन निसान का - रूहअल्ला इमाम असराफील)
- जाए इलम पोहोंच्या हक का (झंडा हकीकी खड़ा हुआ हिंद में)
- कह्या झण्डा उठ्या ईमान का (झण्डा सरीयत का उठ्या)
- फरदा रोज पेहेले कह्या (बाब फरदा रोज का)
- भाई महंमद के मोमिन (बाब हादी गिरो की पेहेचान)
- तो असराफीलें आखिर (बाब असराफील का)
