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विषय-सूची

श्री परिकरमा

श्री कुलजम सरूप के चौदह ग्रन्थों में से एक परिकरमा है । यह ज्ञान परब्रह्म के आवेश स्वरूप श्री प्राणनाथ जी के मुख से पन्ना में प्रकट हुआ और इसकी शैली चौपाइयों के रूप में है ।


विषय सूची-

  1. अब कहूं रे इस्क की बात (इस्क का प्रकरण)
  2. ब्रह्मसृष्टी लीजियो (श्री धाम को बरनन मंगला चरन)
  3. अब आओ रे इस्क भानूं हाम (और ढाल चली)
  4. तुमको इस्क उपजावने (सूरत इस्क पैदा होने की)
  5. वतन आपनो (बन में सरूप सिनगार)
  6. कतरे कई केलन के (जमुना जोए किनारे सात घाट)
  7. सातों घाट बीच में (कुंज बन मंदिर)
  8. अब कहूं मैं ताल की (हौज कौसर ताल जित जोए कौसर मिली)
  9. बन्यो ताल के बीच में (टापू के बीच मोहोलात चौसठ पांखड़ी की)
  10. और पीछल पाल तलाव के (फूलबाग)
  11. ए जो बड़ा चबूतरा (लाल चबूतरा बड़े जानवरों के मुजरे की जागा)
  12. फेर कहूं तले बन की
  13. सुख लीजो मोमिन (मोहोल पहाड़ पुखराजी)
  14. मोहोल के तले ताल जो (ताल बंगले जोए मोहोलात)
  15. किनारे मोहोल जोए के (जमुनाजी का मूलकुंड कठेड़ा चबूतरा ढांपी खुली सात घाट)
  16. तुम देखो दिल में (पुल मोहोल दोऊ जवेर के)
  17. पार जमुना जो बन (पार जोए के बन खूबी)
  18. क्यों दियो रे बिछोहा दुलहा (परिकरमा बड़ी फिराक की)
  19. भोम तले की बैठाए के (खिलवत से चांदनी ताँईं)
  20. दोऊ कमाड़ों की क्यों कहूं (अर्स आगूं खुली चांदनी)
  21. और सुख सातों घाट के (सात घाट पुल हौज)
  22. अब ताल पाल की क्यों कहूं (हौज कौसर)
  23. सुख नेहेरों का अलेखे (नेहेरें मोहोलों में)
  24. पहाड़ मानिक मोहोल कई (मानिक पहाड़ के हिंडोले)
  25. बन छाया है मोहोल जो (बन के मोहोल नेहेरें)
  26. सुख क्यों कहूं पहाड़ पुखराज के (पुखराज से पाट घाट ताँईं)
  27. एह निमूना ख्वाब का (पसु पंखियों की पातसाही)
  28. खावंद इनों में खेलहीं (पसु पंखियों का इस्क सनेह)
  29. अस्वारी पसु पंखियन पर (पसु पंखियों की अस्वारी)
  30. पेहेले किया बरनन अर्स का (तीनों सरूपों की पेहेचान बल अर्स की तरफ का)
  31. बड़ा चौक सोभा लेत है (दसों भोम बरनन)
  32. गैब बातें बका अर्स की (बाब अर्स अजीम का मता जाहेर किया याने एक जवेर का अर्स)
  33. अब देखो अन्दर अर्स के (खिलवत में हाँसी फरामोसी दई)
  34. बेवरा अगली भोम का (परिकरमा नजीक अर्स के)
  35. बड़ीरूह रूहें नूर में (नूर परिकरमा अंदर दस भोम - मंगला चरन)
  36. नूर तरफ पाट घाट नूर का (नूर परिकरमा अन्दर तांई)
  37. कहे आमर नूर अर्स का
  38. बरनन धाम को (धाम बरनन)
  39. प्रेम देखाऊं तुमको साथजी (प्रेम को अंग बरनन)
  40. एक चित्रामन दिवालें बन (धाम की रामतें)
  41. एक अंग अभिलाखी देवें साखी (रामत दूसरी)
  42. कहियत नेहेचल नाम (बड़ी रामत)
  43. नूर कुन्जी अगिन मुसाफ की (सागरों रांग मोहोलात मानिक पहाड़)
  44. साथजी देखो मोहोल मानिक (मोहोल मानिक पहाड़)

इसी सन्दर्भ में देखें-