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विषय-सूची

परिकरमा - प्रकरण ४१

रामत दूसरी

एक अंग अभिलाखी देवें साखी, कहे वचन विसाल । एक कर कंठ बांहें मिल लपटाए, खेलतियां करें ख्याल ॥१॥

एक आवें लटकतियां बोलें मीठी बतियां, चलें चमकती चाल । एक आवें मलपतियां रंग रस रतियां, रहें आठों जाम खुसाल ॥२॥

एक आवें नाचतियां भमरी फिरतियां, दे भूखन पांउ पड़ताल । एक गावती आवें तान मिलावें, कोई स्वर पूरें तिन नाल ॥३॥

एक माहें धाम निरखें चित्राम, देखतियां थंभ दिवाल । एक निरखें नंग नूर भूखन जहूर, माहें देखें अपने मिसाल ॥४॥

एक मिल कर दौड़े बांध के होड़ें, लंबी जहां पड़साल । एक पिउ को देखें सुख विसेखे, कहें आनन्द कमाल ॥५॥

एक बैन रसालें गावें गुन लालें, सोभित मद मछराल । एक बाजे बजावें मिलकर गावें, सुन्दर कंठ रसाल ॥६॥

एक पूरे स्वर सारे हुंनर, छेक बालें तिन ताल । एक पिउसों हँस हँस बातें करे रंग रस, करें होए निहाल ॥७॥

एक देखें धनी रूप अदभुत सरूप, कहा कहूं नूर जमाल । एक पिउ सों बातें करें अख्यातें, रंग रस भरियां रसाल ॥८॥

एक रस रीत उपजावें प्रीत, देखावें अपनों हाल । एक अंग अलबेली आवे अकेली, हाथ में फूल गुलाल ॥९॥

एक अटपटी हालें तिरछी चालें, हाथ में छड़ियां लाल । एक नेत्र अनियाले प्रेम रसालें, रंग लिए नूरजमाल ॥१०॥

कहे महामती इन रंग रती, उठी सो हँस दे ताल ॥११॥

॥ प्रकरण ॥४१॥ चौपाई ॥२३६७॥

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