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विषय-सूची

श्री प्रकास

श्री कुलजम सरूप के चौदह ग्रन्थों में से एक प्रकास है, जिसके दो भाग हैं- गुजराती और हिन्दुस्तानी । यह ज्ञान परब्रह्म के आवेश स्वरूप श्री प्राणनाथ जी के मुख से क्रमशः जामनगर और अनूपशहर में प्रकट हुआ और इसकी शैली चौपाइयों के रूप में है ।


प्रकास गुजराती विषय सूची-

  1. कांई एणी पेरे कीधूं रास
  2. संभारो साथ (श्री साथनो प्रबोध)
  3. सकल साथ रखे कोई वचन विसारो जी
  4. न कांई मनमां न कांई चित (चौपाई प्रगटी)
  5. जुओ रे बेहेनी हूं हाय हाय (विलाप करया छे)
  6. मूंजी सैयल रे (भाखा सिंधी जाटी)
  7. सजण विया मूंजा निकरी (बीजी विलामणी)
  8. खुई सा परडेहडो
  9. हवे एक लवो जो सांभरे सही (चौपाई प्रगटाणी)
  10. हवे विनती एक कहूं मारा वाला (विनती)
  11. हवे आपणमां बेठा आधार
  12. हवे गुणने लखूंजी तमतणां (श्री धणीजीना गुण)
  13. सांभलो साथ मारा सिरदार
  14. मूंजा अंध अभागी जीव जोर रे (जाटी भाषा में प्रबोध)
  15. मूंहजा जीव अभागी रे
  16. मूंजा जीव सुहागी रे (वी वलामणी)
  17. मूंजा साथ सुहागी रे
  18. हूं तां पिउजीने लागूं छूं पाय (विनती)
  19. अखंड दंडवत करूं परणाम
  20. हवे करूं ते अस्तुत आधार (हवे प्रकास उपनो छे)
  21. सांभल जीव कहूं वृतांत (जीवनो प्रबोध)
  22. हवे दृष्ट उघाडी जो पोतानी
  23. हवे वारी जाऊं वनराय वल्लभनी
  24. हवे अस्तुत ऊपर एक विनती कहूं
  25. खुई सा निद्रडी रे (कत्तण जो द्रष्टांत)
  26. खुईसो भरम जो घेंण
  27. हाणे तूं म भूलज रे
  28. भोरी तूं म भूल इंद्रावती
  29. हूं जाणूं निध एकली लऊं (श्री लखमीजीनूं द्रष्टांत)
  30. सुईने सुई सूता सूं करो रे (प्रगटवाणी प्रकासनी)
  31. बेहदी साथ तमे सांभलो (बेहद वाणी)
  32. वली वण पूछे कहूं विचार (दूध पाणीनो विछोडो)
  33. सांभलो साथ कहूं विचार (श्री भागवतनो सार)
  34. हवे वली कहूं ते सुणो (एक सौ आठ पक्ष का सार)
  35. हवे कांईक हूं मारी करूं (गुणनी आसंका)
  36. गुण केटला कहूं मारा वाला
  37. हवे सैयरने हूं प्रगट कहूं (प्रगट वाणी)

प्रकास हिन्दुस्तानी विषय सूची-

  1. कछु इन विध कियो रास
  2. याद करो तुम साथ जी (साथ को प्रबोध)
  3. साथ सकल तुम याद करो
  4. ना कछू मन में ना कछू चित (लीला को प्रकास होना - आत्मा को प्रकास उपज्यो)
  5. श्री सुंदरबाई स्यामाजी अवतार (श्री सुंदरबाई के अंतरध्यान की बीतक)
  6. ओहि ओहि करती फिरों (विलाप)
  7. मेरी सैयल रे (जाटी भाखा का विलाप)
  8. पुकार चले मेरे पिउजी
  9. एक लवो याद आवे सही (चौपाई प्रगटी है)
  10. विनती एक सुनो मेरे प्यारे (सुन्दरसाथ की विनती)
  11. आपन में बैठे आधार
  12. मैं लिखूं श्री धनीजी के गुन (श्री धनीजी के गुन)
  13. सुनो साथ मेरे सिरदार (साथ को सिखापन)
  14. मेरे अंध अभागी जीव (जीव को सिखापन)
  15. मेरे जीव अभागी रे
  16. मेरे जीव सोहागी रे
  17. मेरे साथ सोहागी रे
  18. श्री धनीजी के लागूं पाए
  19. अखंड दंडवत करूं परनाम
  20. अब करूं अस्तुत आधार (अस्तुत कर गुन फिराए हैं)
  21. सुन मेरे जीव कहूं वृतांत (जीव को सिखापन)
  22. आंखां खोल तूं आप अपनी
  23. वारने जाऊं वनराए वल्‍लभ की
  24. अब अस्तुत ऊपर एक विनती कहूं
  25. भट परो तिन नींद को (जाटी प्रबोध - कातनी को द्रष्टांत)
  26. भट परो नींद मोह की
  27. अब तूं जिन भूल आतम मेरी
  28. भोरी तूं न भूल इंद्रावती
  29. मैं जानूं निध एकली लेऊं (लखमीजी को दृष्टांत)
  30. सोई ने सोई सूते क्या करो जी (प्रगटबानी प्रकास की)
  31. बेहद के साथी सुनो (बेहद वानी)
  32. हो वतनी बांधो कमर तुम बांधो (दूध पानी का निबेरा)
  33. सुनियो साथ कहूं विचार (श्री भागवत को सार)
  34. अब कहूं सो हिरदे रख (पख पुष्ट मरजाद प्रवाह)
  35. अब कछुक मैं अपनी करूं (गुनन की आसंका)
  36. गुन केते कहूं मेरे पिउ जी
  37. निजनाम श्री जी साहिब जी (श्री प्रगटवाणी)

इसी सन्दर्भ में देखें-