प्रकास हिन्दुस्तानी - प्रकरण १
॥ प्रकास हिन्दुस्तानी - जंबूर ॥
कछु इन विध कियो रास, खेल फिरे घर । खेल देखन के कारने, आइयां उमेदां कर ॥१॥
उमेदां न हुइयां पूरन, धाख मन में रही । तब धनीजीऐं अंतरगत, हुकम कियो सही ॥२॥
तब तीसरो रचके खेल, स्यामाजी आए इत । तब हम भी आइयां तित, स्यामाजी खेले जित ॥३॥
स्यामाजी को धनिऐं, आवेस अपनो दियो । सब केहे के हकीकत, हुकम ऐसो कियो ॥४॥
इंद्रावती लागे पाए, सुनो प्यारे साथ जी । तुम चेतो इन अवसर, आयो है हाथ जी ॥५॥
॥ प्रकरण ॥१॥ चौपाई ॥५॥
