प्रकास हिन्दुस्तानी - प्रकरण १६
मेरे जीव सोहागी रे, जिन छोड़े पिउ कदम । दूसरी बेर माया मिने, तुझ कारन आए खसम ॥१॥
गुन धनी के याद कर, पकड़ पिउ के पाए । सुखे बैठ सुखपाल में, देसी वतन पोहोंचाए ॥२॥
खेल हंस कर बातड़ी, पेहेचान अपना पिउ । दो बेर धनी तुझ कारने, आए जान अपना जिउ ॥३॥
हैं कैसे धनी देख तूं, तोसों करी है ज्यों । आप ना रख्या आपना, सो याद न कीजे क्यों ॥४॥
कर हिंमत बांध कमर, ले हुकम सब हाथ । पिउ पास हो पेहेचान के, और छोड़ सब साथ ॥५॥
आप कहियो अपने साथ को, जो तुझे खुले वचन । सुध तो नहीं कछू साथ को, पर तो भी अपने सजन ॥६॥
॥ प्रकरण ॥१६॥ चौपाई ॥३४१॥
