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विषय-सूची

श्री रास

श्री कुलजम सरूप के चौदह ग्रन्थों में से एक रास है । यह ज्ञान परब्रह्म के आवेश स्वरूप श्री प्राणनाथ जी के मुख से जामनगर में प्रकट हुआ और इसकी शैली चौपाइयों के रूप में है ।


विषय सूची-

  1. हवे पहेलां मोहजलनी कहूं वात
  2. माया गई पोताने घेर
  3. कांई धणी तणें चरण पसाय (भूंडा जीव जागजे रे)
  4. प्रेम सेवा वाले प्रगट कीधी
  5. एणे पगले आपण चालिए
  6. अखंड सरूपनी अस्थिर आकारे (श्री ठकुराणीजीनो सिणगार)
  7. जोगमाया नो देह धरीने (श्रीसाथनो सिणगार)
  8. पेहेलो सिणगार कीधो मारे वालेजीए (श्री राजजीनो सिणगार)
  9. वालैयो वाणी एम उचरेजी (उथला)
  10. जीवन सखी वृंदावन रंग जोइएजी (वृंदावन देखाड्यूं छे)
  11. वाले वेख लीधो रलियामणो (रामत पेहेली)
  12. मारे वालैए करी उमंग
  13. वालैया रमाडे रे
  14. आवो रे सखियो आपण हमची खूंदिए
  15. वाला आपण रमिए आंख मिचामणी
  16. सखी वृखभान नंदनी
  17. ओरो आव वाला आपण फूंदडी फरिए
  18. भुलवणीनी रामत कीजे
  19. आज राज पूरण काज
  20. रामत गढ तणी रे
  21. रामत करतालीनी रे
  22. उमंग उदयो साथ
  23. ओरो आव वाला आपण घूमडले घूमिए
  24. कोणियां रमिए रे मारा वाला
  25. आवो वाला रामत रासनी कीजे
  26. सखी एक भांत रे
  27. रामत आंबानी कीजे मारा वालैया
  28. रामत उडन खाटलीनी
  29. वाला तमे निरत करो मारा नाहोजी रे
  30. मृदंग चंग तंबूर रंग अति उमंग
  31. हमचडी सखी संग रे
  32. वृंदावनमां रामत करतां (रामत अंतरध्याननी)
  33. आनंदे रोतां रमिए एम
  34. उछरंग अंग सुंदरी
  35. आपण रंग भर रमिए रास
  36. रमत रास करत हांस
  37. जुओ रे सखियो तमे वाणी वालातणी
  38. बलियामां दीसे बल
  39. आवी केसरबाई कहे रे बेहेनी (केसरबाईनो झगडो)
  40. छेडो न छटके अंग न अटके
  41. ऊभा ने रहो रे वाला ऊभा ने रहो
  42. एणे समे रामत गमे
  43. छेल छंछेरीने लीधी बाथ जुगते
  44. सखी सखी प्रते स्याम
  45. अणी हांरे झीलण रंग सोहामणां रे (झीलणां)
  46. फरतण फेर बाजोटिया (भोग)
  47. वाला वालमजी मारा

इसी सन्दर्भ में देखें-