श्री रास
श्री कुलजम सरूप के चौदह ग्रन्थों में से एक रास है । यह ज्ञान परब्रह्म के आवेश स्वरूप श्री प्राणनाथ जी के मुख से जामनगर में प्रकट हुआ और इसकी शैली चौपाइयों के रूप में है ।
विषय सूची-
- हवे पहेलां मोहजलनी कहूं वात
- माया गई पोताने घेर
- कांई धणी तणें चरण पसाय (भूंडा जीव जागजे रे)
- प्रेम सेवा वाले प्रगट कीधी
- एणे पगले आपण चालिए
- अखंड सरूपनी अस्थिर आकारे (श्री ठकुराणीजीनो सिणगार)
- जोगमाया नो देह धरीने (श्रीसाथनो सिणगार)
- पेहेलो सिणगार कीधो मारे वालेजीए (श्री राजजीनो सिणगार)
- वालैयो वाणी एम उचरेजी (उथला)
- जीवन सखी वृंदावन रंग जोइएजी (वृंदावन देखाड्यूं छे)
- वाले वेख लीधो रलियामणो (रामत पेहेली)
- मारे वालैए करी उमंग
- वालैया रमाडे रे
- आवो रे सखियो आपण हमची खूंदिए
- वाला आपण रमिए आंख मिचामणी
- सखी वृखभान नंदनी
- ओरो आव वाला आपण फूंदडी फरिए
- भुलवणीनी रामत कीजे
- आज राज पूरण काज
- रामत गढ तणी रे
- रामत करतालीनी रे
- उमंग उदयो साथ
- ओरो आव वाला आपण घूमडले घूमिए
- कोणियां रमिए रे मारा वाला
- आवो वाला रामत रासनी कीजे
- सखी एक भांत रे
- रामत आंबानी कीजे मारा वालैया
- रामत उडन खाटलीनी
- वाला तमे निरत करो मारा नाहोजी रे
- मृदंग चंग तंबूर रंग अति उमंग
- हमचडी सखी संग रे
- वृंदावनमां रामत करतां (रामत अंतरध्याननी)
- आनंदे रोतां रमिए एम
- उछरंग अंग सुंदरी
- आपण रंग भर रमिए रास
- रमत रास करत हांस
- जुओ रे सखियो तमे वाणी वालातणी
- बलियामां दीसे बल
- आवी केसरबाई कहे रे बेहेनी (केसरबाईनो झगडो)
- छेडो न छटके अंग न अटके
- ऊभा ने रहो रे वाला ऊभा ने रहो
- एणे समे रामत गमे
- छेल छंछेरीने लीधी बाथ जुगते
- सखी सखी प्रते स्याम
- अणी हांरे झीलण रंग सोहामणां रे (झीलणां)
- फरतण फेर बाजोटिया (भोग)
- वाला वालमजी मारा
