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विषय-सूची

रास - प्रकरण १४

राग श्री कालेरो

आवो रे सखियो आपण हमची खूंदिए, वालाजीने भेला लीजे रे । रामत करतां गीतज गाइए, हांस विनोद रंगडा कीजे रे ॥१॥

मारा वालैया ए रामत घणूं रूडी, हमचडी रलियाली रे । कालेरामां कण्ठ चढावी, गीत गाइए पडताली रे ॥२॥

हमचडीनो अवसर आव्यो, आगे कह्यूं नहीं अमे तमने रे । एवो समयो अमने क्यांहे न लाधो, हामडी रहीती अमने रे ॥३॥

जे रस छे वाला हमचडीमां, ते तो क्यांहे न दीठो रे । जेम जेम सखियो आवे अधकेरी, तेम तेम दिए रस मीठो रे ॥४॥

वचन सर्वे गाइए प्रेमना, तेना अर्थ अंगमा समाय । ते ता अर्थ प्रगट पाधरा, हस्तक वाला संग थाय ॥५॥

अमृत पीजे ने चुमन दीजे, कंठडे वालाने वलाइए । हमचडीमां त्रण रस लीजे, रेहेस रामतडी गाइए ॥६॥

ए रामतमा विलास जे कीधा, ते केहेवाय नहीं मुख वाणी रे । सर्वे सुखडा लई करीने, रह्या रूदयामां जाणी रे ॥७॥

जेटला वचन गाया अमे रमता, ते सर्वेना सुख लीधां । कहे इंद्रावती केम कहूं वचने, अनेक सुख वाले दीधां ॥८॥

॥ प्रकरण ॥१४॥ चौपाई ॥४५४॥

इसी सन्दर्भ में देखें-