रास - प्रकरण १८
राग केदारो
भुलवणीनी रामत कीजे, वाला तमे अम आगल थाओ रे । दोडी सको तेम दोडजो, जोइए अम आगल केम जाओ रे ॥१॥
भुलवणीमां भूलवजो, देजो वलाका अपार । भूलवी तमारी हूं नव भूलूं, तो हूं इंद्रावती नार ॥२॥
जुओ रे सखियो वाले भूलवी मूने, पण हूं केमे नव टली । अनेक वलाका दीधां मारे वाले, तो हूं मलीने मली ॥३॥
रहो रहो रे वाला मारे वांसे थाओ, हूं तम आगल थाऊं रे । साची तो जो भूलवुं तमने, मारा साथ सहुने हसावूं रे ॥४॥
सखियो तमे सावचेत थाजो, रखे कोई मूकतां हाथ रे । हमणा हरावुं मारा वालाजीने, जो जो तमे सहु साथ रे ॥५॥
भूलीस मारे वचिखिण वाला, आवी मारे वांसे वलगो । अनेक वलाका जो हूं दऊं, पण तूं म थाइस अलगो ॥६॥
एक वलाका मांहें रे सखियो, वालो भूल्या ते प्रथम मूल । दिए सखी ताली पडी आलोटे, हँसी हँसी आवे पेट सूल ॥७॥
सहु साथ मलीने साबत कीधुं, इंद्रावती विविध विसेक । घणी थई रामत ने वली थासे, पिउ भूलवतां राखी रेख ॥८॥
॥ प्रकरण ॥१८॥ चौपाई ॥४९८॥
