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विषय-सूची

रास - प्रकरण २१

राग श्री काफी

रामत करतालीनी रे, एमा छे वलाका विसमा । बेसवूं उठवूं फरवूं रमवूं, ताली लेवा साम सामा ॥१॥

तम सामी अमे ऊभा रहीने, हाथ ताली एम लेसूं । बेसंता उठता फरता, सामी ताली देसूं ॥२॥

बेसंता ताली दईने बेसिए, उठंता लीजे ताली । फरता ताली दई करीने, वचे रामत कीजे रसाली ॥३॥

रामत करता अंग सहु वालिए, सकोमल जोड सोभंत । अंग वाली वचे रंग रस लीजे, भंग न कीजे रामत ॥४॥

ए रामतडी जोई करीने, सहु साथने वाध्यो उमंग । सहु कोई कहे अमे एणी पेरे, रमसूं वालाजीने संग ॥५॥

साथ कहे वाला रमो अमसूं, ए रामत सहु मन भावी । सहुना मनोरथ पूरण करवा, सखी सखी प्रते लेओ रंग आवी ॥६॥

हाथ ताली रमे छे वालो, सघलीसूं सनेह । रंगे रमाडे रास मां, वालो धरी ते जुजवा देह ॥७॥

कहे इंद्रावती ए रामतडी, मारा वालाजी थई अति सारी । सघली संगे रमिया रंगे, एक पिउ एक नारी ॥८॥

॥ प्रकरण ॥२१॥ चौपाई ॥५२४॥

इसी सन्दर्भ में देखें-