रास - प्रकरण २४
राग वसंत
कोणियां रमिए रे मारा वाला, गाइए वचन सनेह । मनसा वाचा करी करमना, सीखो तमने सीखवुं एह ॥१॥
ए रामतडी जोरावर रे, दीजे ठेक अंग वाली । रमतां सोभा अनेक धरिए, गाइए वचन कर चाली ॥२॥
करे रमिए कोणियां रमिए, चरण रामतडी कीजे । वली रामतमां विलास विलसी, प्रेम तणां सुख लीजे ॥३॥
जुओ रे सखियो वालो कोणियां रमतां, भांत भांत अंग वाले । सखियो रामत बीजी करी नव सके, उभली जोड निहाले ॥४॥
कर मेलीने कोणियां रमिए, कोणी मेलीने करे । अंगडा वाले नेंणा चाले, मनडां सकलनां हरे ॥५॥
ए रामतना रस कहूं केटला, थाय निरतना रंग । हस्त चरणनां भूखण सर्वे, बोले बंनेना एक बंग ॥६॥
लटके गाए ने लटके नाचे, लटके मोडे अंग । लटके रामत रेहेस लटके, लटके सांईं लिए संग ॥७॥
मारा वालाजीमां एक गुण दीसे, जाणे रामत सीख्या सहु पेहेली । इंद्रावतीमां बे गुण दीसे, एक चतुर ने रमता गेहेली ॥८॥
॥ प्रकरण ॥२४॥ चौपाई ॥५४९॥
