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विषय-सूची

रास - प्रकरण २७

राग सामेरी

रामत आंबानी कीजे मारा वालैया, आवी ऊभा रहो लगतां रे । सखियो ज्यारे बल करे, त्यारे रखे कांई तमे डगतां रे ॥१॥

तमे आंबला ना थड थाओ, अमे चरण झालीने बेसूं । मारो आंबो दहिए दूधे सीचूं, एम केहेसूं प्रदखिणा देसूं ॥२॥

केटलीक सखियो आंबलो सींचे, अमे चरण तमारे वलगां । दृढ करीने अमे चरण ग्रह्या, जोइए कोण करे अमने अलगां ॥३॥

बल करीने तमे ऊभा रहेजो, खससो तो हँससे तम पर । जो अमे चरण ग्रही नव सकूं, तो सहु कोई हँससे अम पर ॥४॥

ते माटे रखे चरण चाचरो, थिर थई ऊभा रेहेजो । जो जोर घणुं आवे तमने, त्यारे तमे अमने केहेजो ॥५॥

अनेक सखियो चरणे वलगी, खसवा नहीं दीजे रे । वालो सखियो सहु थाजो सावचेत, ओलियो ऊपर सामी हांसी कीजे ॥६॥

जे सखी सांची थई ने वलगी, ते ता वछोडतां नव छूटे रे । ओलियो सखियो बल करी करी थाकी, ते ता उठाडता नव उठे रे ॥७॥

जे सखी चरणे रही नव सकी, ते पर हांसी थई अति जोर रे । इंद्रावती वालो ने सखियो, दिए ताली हांसी करे सोर रे ॥८॥

॥ प्रकरण ॥२७॥ चौपाई ॥५७४॥

इसी सन्दर्भ में देखें-