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विषय-सूची

रास - प्रकरण ४१

राग मारू

ऊभा ने रहो रे वाला ऊभा ने रहो, हजी आयत छे अति घणी । रामत रमाडो अमने, उलट जे अमतणी ॥१॥

अनेक रंगे रमाडियां, केटलां लऊं तेना नाम । सखी सखी प्रते जुजवा, सहुना पूरण कीधां मन काम ॥२॥

आ भोमनो रंग उजलो, कांई तेज तणो अंबार । वस्तर भूखण आपना, सूं कहूं सरूप सिणगार ॥३॥

नेहेकलंक दीसे चांदलो, नहीं कलातणो कोई पार । उठे अलेखे किरणें, सहु झलकारों झलकार ॥४॥

वन वेलडियो छाइयो, रलियामणां फूल कई रंग । वाय सीतल रंग प्रेमल, कांई अंगडे वाध्यो उमंग ॥५॥

वली रस वनमां छे घणों, मीठी पंखीडानी वाण । ए वन मुकाय नहीं, रूडो अवसर ए प्रमाण ॥६॥

अनेक विलास कीधां वनमां, मली सहुए एकांत । ए सुखनी वातो सी कहूं, कांई रमियां अनेक भांत ॥७॥

हवे एक मनोरथ एह छे, आपण रमिए एणी रीते । बाथ लीजे बंने बल करी, जोइए कोंण हारे कोंण जीते ॥८॥

झलके झीणी रेतडी, नहीं कांकरडी लगार । थाय रूडी इहां रामत, आपण रमिए आधार ॥९॥

सखियो तमे ऊभा रहो, जेवुं होय तेवुं केहेजो । बंने लऊं अमें बाथडी, तमे साख ते सांची देजो ॥१०॥

दोडी लीधी कंठ बांहोंडी, बंने करी हो हो कार । सखियो मनमां आनंदियो, सुख देखी थयो करार ॥११॥

चरण आंटी भुज बंध वाली, कोई न नमे रे अभंग । बाथो लिए बंने बल करी, रस चढतो जाय रंग ॥१२॥

वालो बलाका देवाने, नीचा नमाव्या चरण । हो हो वालाजी हारिया, हँसी हँसी पडे सहु धरण ॥१३॥

सखियो कहे अमे जीतियो, सुख उपनूं आसाधार । ताली दई दई हरखियो, लडथडे पडे सहु नार ॥१४॥

अणची कां करो रे सखियो, हूं जाणूं छूं तमारू जोर । जीत्या विना एवडी उलट, कां करो एवडो सोर ॥१५॥

हारया हारया अमने कां कहो, आवो लीजे बीजी बाथ । जे हारसे ते हमणां जोसूं, तमे सांची केहेजो सहु साथ ॥१६॥

आवो वली बाथो बीजी लीजिए, एक पूठीने अनेक । हमणां हरावुं तमने, वली हंसावुं वसेक ॥१७॥

कहे इंद्रावती हूं बलवंती, सुणजो सखियो वात । नेहेचे तमने ऊंचूं जोवरावुं, वली रामत करूं अख्यात ॥१८॥

॥ प्रकरण ॥४१॥ चौपाई ॥८०२॥

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