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विषय-सूची

रास - प्रकरण ४३

राग धन्या छंद

छेल छंछेरीने लीधी बाथ जुगते, रामत कीधी अति रंग जी । स्याम सुन्दरी बंने सरखी जोड, जाणिए एकै अंग जी ॥१॥

वली रामत मांडी एक जुगते, जाणिए सघली अभंग जी । रामत करतां आलिंघण लेतां, लटके दिए चुमन जी ॥२॥

रमतां भीडे कठण कुचसों, छबकेसूं रंग लेत जी । अमृत पिए वालोजी रमतां, अधुर इंद्रावती देत जी ॥३॥

अधुर लई मुख मांहें मारे वाले, आयत कीधी अपार जी । भूखण उठ्या उठ्या अंगों अंगे, रहो रहो समरथ सार आधार जी ॥४॥

रम्या रम्या मारा मारा वाला वाला, पाछी पाछी रामत कोय न रही । हवे ने हवे आधार, आयत पूरण थई ॥५॥

सम सम दऊं दऊं स्याम स्याम सुणो सुणो, मम मम भीडो एणी भांतजी । बोली बोली न न सकूं बलिया रे बलिया, पूरी पूरी मारी मारी खांत जी ॥६॥

दई दई सम सम थाकी थाकी तमने, कां कां करो भीडा भीड जी । आयत आयत आवे रे अंगों अंगें, त्यारे न देखो पीड जी ॥७॥

मन मन मनोरथ पूरया पूरया वाला वाला, वली वली लागूं पायजी । केही केही पेरे पेरे कहूं कहूं तमने, स्वांस स्वांस हैडे मुझाय जी ॥८॥

कर कर जोडी जोडी कहूं कहूं वाला वाला, वली वली मानज मांगूं जी । मेलो मेलो मुखथी वात कहूं, नमी नमी चरणे लागूं जी ॥९॥

जेवी अमने आयत हुती, तमे तेवा रमाड़यां रंग जी । साथ सकलमां एम सुख दीधां, इंद्रावती पामी आनन्द जी ॥१०॥

॥ प्रकरण ॥४३॥ चौपाई ॥८१६॥

इसी सन्दर्भ में देखें-