श्री सनन्ध
श्री कुलजम सरूप की चौदह किताबों में से एक सनन्ध है । यह ज्ञान श्री जी साहिब प्राणनाथ जी के मुख से अनूपशहर में प्रकट हुआ और इसकी शैली चौपाइयों के रूप में है ।
विषय सूची-
- अल्ला मुहबा मासूक (सनंध पेहेली अल्ला रसूल की)
- कलाम आरबी हक रसूल ना (सनंध आरबी की)
- भेख भाखा जिन रचो (हिंदुस्तानी भाखा में चौपाई सुरू)
- सुनियो बानी मोमिनो (सनंध इमाम के स्वाल जवाब की)
- पिया मैं विध विध तोको ढूंढ़िया (सनंध खोज की)
- मैं चाहत न स्वांत इन भांत (सनंध विरह तामस की)
- तलफे तारूनी रे (सनंध विरह इस्क वृध की)
- विरहा गत रे जाने सोई
- इस्क बड़ा रे सबन में
- सनमंध मूल को
- एह बात मैं तो कहूं (सनंध विरह के प्रकास की)
- अब ढूंढ़ों रूहें अर्स की (सनंध मोमिन को ढूंढ़ने की)
- अब निरखो नीके कर (सनंध खेल के मोहोरों की)
- अब गुझ बताऊं खेल का (सनंध खेल में खेल की)
- अजूं देखाऊं नीके कर (सनंध जुदे जुदे फिरकों के जिद की)
- ए खेल रच्यो हम खातिर (सनंध - वैराट की जाली)
- ए खेल देख्या ख्वाब का (सनंध वेद के कोहेड़े की)
- मोमिन यामें न रांचहीं (सनंध हांसी की)
- ए जो फरेब तुम देखिया (सनंध कलमें की)
- फुरमान ल्याया जो रसूल (सनंध फुरमान की)
- सुनियो अब मोमिनों (सनंध - मुस्लिम की रेहेनी)
- गुझ तो तुमको कहूंगी (सनंध - अर्स अरवाहों के लछन)
- दिल हकीकी रूहें अर्स की (सनंध दिल मोमिन अर्स सुभान की)
- केहेती हों मोमिन को (सनंध - रसूल साहेब की पेहेचान बातूनी)
- कही कजा जो रसूलें (सनंध नबी नारायन की)
- नेक कहूं दोजख की (सनंध दोजख की)
- अब नींद उड़ी सबन की (सनंध अगुओं ग्यानी की)
- इत आए करी जो रसूलें (सनंध बिना एक महंमद की)
- अब सो कहां है महंमद (सनंध - अब सो कहां है महंमद)
- खातिर प्यारी रूहें मोमिन (सनंध इमाम रसूल की)
- जिन मोमिन के कारने (सनंध दज्जाल की)
- प्रताप इमाम कहा कहूं (सनंध इमाम के प्रताप की)
- सुनियो दुनियां आखिरी (सनंध कजा की)
- सम्मेन कलिम कलामी (सनंध आरबी की)
- कारण अरवा अर्सजी (सनंध - सिन्धी भाखा)
- इत ईसा मसी आए के (सनंध ईसा इमाम के कजा की)
- अब कहूं बिध नूरियों (सनंध फरिस्ते फना आखिरत भिस्त कयामत की)
- हुकमें परदा उड़ाइया (सनंध हुकम की)
- कह्या जाहेर रसूलें (सनंध नूर नूर-तजल्ला की)
- लिख्या है कतेब में (सनंध खंडनी जाहेरियों की)
- तुमको देऊँ सुख जागनी (सनंध - पत्री बड़ी)
- प्रीतम मेरे प्रान के (सनंध - पत्री छोटी)
