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विषय-सूची

सनन्ध - प्रकरण ३४

सनंध आरबी की

सम्मेन कलिम कलामी, नास कुरब अना कसीर । अना हाकी हकाइयां कलूब अना, लिसान इस्म कबीर ॥१॥ नेक मैं कहुँ बोली मेरी, आदमी कबीले मेरे बहुत हैं । मैं कहुँ बातें दिल मेरे की, साथ मेरे नाम बड़े हैं ॥१॥

फआल नफस इस्म इमाम, बाद कलिम कुल्ल नास । बला किन ला अरफ कुरान, अना मिन्हुम कुल्ल लिरास ॥२॥ धरया अपना नाम इमाम, पीछे कहेंगे सब आदमी । ए पर नहीं समझें कुरान, मैं इनमें से सब लिए साथ सिरके ॥२॥

अल्लजी हकाइयां कलूब अना, मा खफी मिन्कुम । कुम्यकून कुरब अना, अल्लजी रूह मुस्लिम ॥३॥ जो बातें दिल मेरे की हैं, ना छिपाऊँ तुम से । तुम हो कबीलें मेरे के, जो कोई रूहें मुस्लिम हैं ॥३॥

लेस खबर मा कुम कमा, अल्लजी बरारब । हाजा मुस्लिम कुल्ल हुंम, फआल अली मिन्जरब ॥४॥ नहीं हैं खबर तुमको ऐसी, जैसी कछू जिमी अरब की । ए मुसलमान सारे जो हैं, किए अली ने मोहों मार के ॥४॥

व ला लहुमा एैयून, खारज व ला दखल । व लहुम लेस इगनू, व लहुम लेस अकल ॥५॥ और नहीं हैं इनको आंखें, बाहेर की और नहीं है अन्दर की । और इनोंके नहीं है कान, और इनोंको नहीं है अकल ॥५॥

जरब अना वज्हे मिन्सेफ, फआल अना मुसलमीन । लाकिन जाहिल इमन, व ला ए जाआ यकीन ॥६॥ मारे मैं मोहों समसेर के से, किए मैंने मुसलमान । पर मूरख जो हैं इमनके, और नहीं इनोंको आया आकींन ॥६॥

लिहाजा कमा काल इमन, ला बारकला मुसलमीन । बारकला धन्य ला बारकला धृक, कुलू बारकला हिन्द मुस्लिम, खुजू रास कलाम यकीन ॥७॥ इस वास्ते ऐसा कह्या इमनको, नहीं है बरकत इन मुसलमानों को । कही बरकत हिन्द के मुसलमानों को, लिए सिर कलाम आकीन करके ॥७॥

हाजा फास खबर इन्द कुंम, यज्लिस हिन्द सुब्हान । कमा अवल काल रसूल, अना हस्ना हिन्द मकान ॥८॥ ए जाहेर खबर पास तुमारे है, बैठेंगे हिन्द में खावंद । ऐसा पहले कह्या रसूलने, मेरा नेक हैं हिंद स्थान ॥८॥

व ला लेतनी मौला रदो, अल्लजी हाकीयतो महंमद । लागिल मुस्लिम इमाम, जा आ हिंदल अर्ज ॥९॥ और न कदी खावन्द रद्द करे, जो कछू कह्या है महंमद ने । वास्ते इन मुसलमानों के इमाम मेंहदी, आया हिन्द की जिमी ॥९॥

कुंम अल्लजी मुस्लिम, रसूल कुल्लहो कलिम । यजाआ यकीनल्कुम, खैर तल्बो हिन्द मुस्लिम ॥१०॥ तुम जो कोई मुस्लिम हो, रसूल ने सबको कहा है । आवेगा यकीन तुमारे तांई, पनाह मांगो हिन्द के मुसलमानों से ॥१०॥

यव्सरो हाजा कलमा, दाखल कलूब कुम्म । सैयबो विलाद कुल्हुम, खैर तलबो हिन्द मुस्लिम ॥११॥ देखो एह वचन, बीच दिल तुमारे के । छोड़ो विलायत सबकी, बखसीस मांगो हिंद के मुसलमानों पें ॥११॥

अल्लजी कलिमा रसूलना, खुजू मुहव्ब कलाम । लागिल हिन्द मुस्लिम, हुबहुम जाआ इमाम ॥१२॥ जिन किनों ने वचन रसूल मेरे के, लिए प्यारसों बोल । वास्ते हिंद के मुसलमानों के, प्यार कर इनों पर आये इमाम मेंहदी ॥१२॥

अल्लजी रसूल सैयबो, ऐया अना फआली हुम । खला अना अर्ज आरब, जाआ अना इन्द कुम ॥१३॥ जो रसूल ने छोड़ दई, क्या मैं करूं उसको । छोड़ी हम जिमी अरब की, आए हम पास तुमारे ॥१३॥

इस्मयो हिन्द मुस्लिम, अनी कलिम सिदक । यकीन कान इन्द कुम, व कायमुल्कलमे हक ॥१४॥ सुनो हिन्द के मुसलमानों, मेरे कहना है सांच । अकीन है पास तुमारे, और कायम हो साथ कलमे हक के ॥१४॥

अवल स्वाल रसूल ना, व लाए आरफ अहद । दलहिन कुल्ल य आरिफो, जाआ कलिम महंमद ॥१५॥ पहले बोल रसूल मेरेके, और नहीं समझया कोई आदमी । अब सब यह समझेंगे, आया वचन महम्मद साहेब का ॥१५॥

अल्लजी जाआ कुम मुस्लिम, हाजा लागिल कुम फआल सुगल । इब्सर सुगल अना यरजा, अल्लजी मुस्लिम कुल्ल ॥१६॥ जो आए हो तुम मुस्लिम, यह खातिर तुमारे किया है खेल । देख खेल हम फिरेंगे, जो कोई है मुस्लिम सो सब ॥१६॥

अनी कुल्ल मुस्लिम वादेह, अस्लू वाहिद मकानी । कांन हक वाहिद अना, गैर मुस्लिम लेस सांनी ॥१७॥ हम सब मुस्लिम एक हैं, असल एक है ठौर हमारा । है खसम एक हमारा, बिना मुस्लिम नहीं कोई दूसरा ॥१७॥

अनी हबो कुल्ल मुस्लिम, लाकिन जायद सिंध । हाल अना कलिमे सिंध मुस्लिम, बाद कलिम अना हिन्द ॥१८॥ मेरे प्यारे तमाम मुस्लिम, लेकिन अधिक हैं सिन्ध के । अब मैं कहत हूं सिंध के मुसलमानों को, पीछें कहुंगी मैं हिंद के मुसलमानों को ॥१८॥

॥ प्रकरण ॥३४॥ चौपाई ॥११९५॥

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