सनन्ध - प्रकरण ४२
सनंध - पत्री छोटी
प्रीतम मेरे प्रान के, आतम के आधार । ए दिल भीतर देखियो, है अति बड़ो विस्तार ॥१॥
सैयां सुन दौड़ियो, सई मेरी नाहीं बिलम कछू अब । ऐसी खबर दई महंमदें, सैयां सुन दौड़ियो सब ॥२॥
कागद चौदे तबक के, मैं देखी हकीकत । सब गावें लीला जागनी, पर बड़ी महंमद की मत ॥३॥
महंमद पाती के वचन, सुनियो भीम मकुंद । आगम था पट बीच में, सो काढ़या पट निकंद ॥४॥
आगम निगम सब लिख्या, हुआ है होसी जेह । ए बानी तो बोहोत है, पर नेक कहूं तुमें एह ॥५॥
ए खेल है जो नींद का, तामें आधी दई उड़ाए । बाकी उड़ाए देत हों, तुम साथ को लीजो बुलाए ॥६॥
तारीख तीन ब्रह्मांड की, केहेती हों कर हेत । नींद एक आधी दूसरी, तीसरी में सावचेत ॥७॥
बरस पांच हजार पर, सात सै सैंतालीस । होसी नेहेचल नूर नजरों, जित दिन हजार बरीस ॥८॥
यामें नव सै छेहंतर जब हुए, तब हुआ नूह तोफान । जल ऊपर तले से उमड़या, हो गया एक जिमी आसमान ॥९॥
पार हुई तहां से रूहें, और सब हुए गरक । फेर तीसरा ए पैदा हुआ, यों देत साहेदी हक ॥१०॥
आद आदम के छपन सै, बीते जब सैंतीस । तबहीं दस सदी पर, होसी नब्बे बरीस ॥११॥
महंमद हुआ मेंहेदी, सैयद केहेलाया सही । खिताब दिया जब खसमें, तब भेली इमाम भई ॥१२॥
रूह अल्ला ईसा रोसन, असराफील अकल । सूरत साफ जबराईल, आए मेंहेंदी में मिले सकल ॥१३॥
हुआ हिंदुओं में जाहेर, हिंद से पाक मरद । इस्क राह चलावसी, चालीस बरस लों हद ॥१४॥
काबिल हिंद के बीच में, होसी इमाम रोसन । ए लीजो प्रगट इसारतें, दोए रूहों का मिलन ॥१५॥
कोई दूजा मरद न कहावहीं, एक मेंहेंदी पाक पूरन । खेलसी रास मिल जागनी, छत्तीस हजार सैयन ॥१६॥
असलू जुथ रूहें चालीस, तिनमें बारे हजार । बारे भेलियां रास में, इत चौबीस सहस्त्र कुमार ॥१७॥
दस बरस लों खेलहीं, होसी विनोद कई हाँस । सबके मनोरथ पूरने, करसी बड़ो विलास ॥१८॥
सत वैराट में पसरया, काढ़या कुली जालिम । चौदे तबक सचराचर, नूर इस्क हमारा हम ॥१९॥
एक जरा जुलम न रेहेवहीं, सुबुध सबों में धरम । बरत्यो सुख संसार में, विकार काटे सब करम ॥२०॥
जब पूरन सदी अग्यारहीं, तब जागनी रास तमाम । मन चाह्या सुख दे सबों, हँसते उठे घर धाम ॥२१॥
पीछे सदी अग्यारहीं के, जब होसी तीस बरस । बनी आदम पसु पंखी, नूर इस्क पिलाया रस ॥२२॥
रोसनाई नूर बुध की, रही न किसी की हाम । बारहीं सदी संपूरन, ब्रह्मांड ने पायो इनाम ॥२३॥
अछर के दोए चसमें, नहासी नूर नजर । बीसा सौ बरसों कायम, होसी वैराट सचराचर ॥२४॥
ए तलबे तुम वास्ते, मैं नेक देखी किताब । ए दिन दिलमें आन के, तुम साथ मिलाओ सिताब ॥२५॥
बेरिज करी वैराट की, ए पढ़ियो चित दे । खेलाए रास जागनी, झलकाओ नूर ए ॥२६॥
मेंहेंदी हदां कर दई, घर इमाम बताई राह । पोहोंचे अर्स मेयराज को, हँस मिलियां रूहें खुदाए ॥२७॥
॥ प्रकरण ॥४२॥ चौपाई ॥१६९१॥
प्रकरण तथा चौपाइयों का संपूर्ण संकलन
प्रकरण २१४, चौपाई ६३६०
॥ सनंध सम्पूर्ण ॥
