श्री सिंधी
श्री कुलजम सरूप के चौदह ग्रन्थों में से एक सिंधी है । यह ज्ञान परब्रह्म के आवेश स्वरूप श्री प्राणनाथ जी के मुख से पन्ना में प्रकट हुआ और इसकी शैली चौपाइयों के रूप में है ।
विषय सूची-
- आखिर वेरा उथणजी
- रे पिरीयम हथ तोहिजडे हाल
- रे पिरीयम मंगां सो लाड करे
- रे पिरीयम मंगां सो लाड करे
- सांगाए थिंदम धाम संगजी (श्री देवचंदजी मिलाप विछोहा)
- धणी मूंहजी रूहजा (रूहन जो फैल हाल)
- वलहा जे आंऊं तोके वलही (झगडे जो प्रकरण)
- रूह-अल्ला डिन्यूं निसानियूं (बाब जाहेर थियणजा)
- चई सुंदरबाई असां के (मारकंडजो दृष्टांत)
- सुणो रूहें अर्स जी (आसिकजा गुनाह)
- लखे भते न्हारयम (खुदीजी पेहेचान)
- ताडो कुंजी ना दर उपटण (हुकमजी पेहेचान)
- कांध रूह भाइयां सिफत करियां (हक हादी रूहोंजी सिफत)
- सुनो रूहें अर्स की (आसिक के गुनाह)
- मैं लाखों विध देखिया (मैं खुदी की पेहेचान)
- ताला द्वार न कुंजी खोलना (हुकम की पेहेचान)
