श्री सिनगार
श्री कुलजम सरूप के चौदह ग्रन्थों में से एक सिनगार है । यह ज्ञान परब्रह्म के आवेश स्वरूप श्री प्राणनाथ जी के मुख से पन्ना में प्रकट हुआ और इसकी शैली चौपाइयों के रूप में है ।
विषय सूची-
- बरनन करो रे रूहजी
- अब हुकमें द्वारा खोलिया (हुकमें इस्क का द्वार खोल्या है)
- आसिक इन चरन की
- ऐसा आवत दिल हुकमें (आतम फरामोसी से जागे का प्रकरण)
- सखी री तेज भरयो आकास लों (चरन को अंग तिनमें नख अंग)
- फेर फेर चरन को निरखिए (चरन हक मासूक के उपली सोभा)
- ए क्यों छोड़े चरन मोमिन (चरन निसबत का प्रकरण अन्दरतांई)
- उमर जात प्यारी सुपने (कदम परिकरमा निसबत)
- अर्स अंदर सुख देवहीं (अर्स अंदर निसबत चरन)
- असल इजार एक पाच की (श्री राजजी की इजार)
- रूह मेरी क्यों न आवे तोहे लज्जत (खुले अंग सिनगार छबि छाती)
- मुख मेरे मेहेबूब का (खभे कण्ठ मुखारविंद सोभा समूह)
- श्रवन की किन विध कहूं (हक मासूक के श्रवण अंग)
- देखों नैना नूरजमाल (हक मासूक के नेत्र अंग)
- गौर निरमल नासिका (हक मेहेबूब की नासिका)
- जाको नामै रसना (हक मासूक की जुबान की सिफत)
- देत निमूना बीच नासूत (हक मासूक के वस्तर)
- भूखन सब्दातीत के (हक मेहेबूब के भूखन)
- फेर फेर पट खोलें हुकम (जोबन जोस मुख बीड़ी छबि)
- हक इलम के जो आरिफ (हक मासूक का मुख सागर)
- याद करो हक मोमिनों (मुखकमल मुकट छबि)
- क्यों बरनों हक सूरत (सिनगार कलस तिन सिनगार बरनन विरहा रस)
- अरवा आसिक जो अर्स की (मोमिन दुनी का बेवरा)
- सोई कहूं हकीकत मारफत (हकीकत मारफत का बेवरा)
- इस्क रब्द खिलवत में (मोमिनों की सरियत, हकीकत, मारफत, इस्क रब्द का प्रकरण)
- बसरी मलकी और हकी (कलस का कलस)
- एता मता तुम को दिया (मता हक-ताला ने मोमिनों को दिया)
- बरनन कराए मुझपे
- रूहों मैं रे तुमारा आसिक (हक मेहेबूब के जवाब)
