सेवा
सेवा का अर्थ है किसी को सुख प्रदान करने के लिए किया जाने वाला कार्य ।
अध्यात्म में अपने आराध्य या गुरु की सेवा करने का विधान है । बहुत से लोग समाज की सेवा के लिए भी तत्पर रहते हैं ।
सेवा के मार्ग
सेवा करने के अनेक मार्ग हैं-
- आर्थिक सेवा - अर्थ (धन) द्वारा की जाने वाली सेवा को आर्थिक सेवा कहते हैं, जैसे- दान, भण्डारा, मन्दिर बनवाना, आदि ।
- शारीरिक सेवा - शरीर द्वारा की जाने वाली सेवा को शारीरिक सेवा कहते हैं, जैसे- आरती, परिक्रमा, जप, पाठ, आदि ।
- मानसिक सेवा - मन-बुद्धि द्वारा की जाने वाली सेवा को मानसिक सेवा कहते हैं, जैसे- चिन्तन, ग्रन्थ लिखना, प्रवचन देना, आदि ।
- आत्मिक सेवा - चेतना के स्तर पर की जाने वाली सेवा को आत्मिक सेवा कहते हैं, जैसे- चितवन, परब्रह्म से प्रेम, आदि ।
इनमें से आर्थिक सेवा को कम और आत्मिक सेवा को अधिक श्रेष्ठ समझना चाहिए ।
