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कैवल्य | Kaivalya

कैवल्य वह अवस्था है, जिसमें चेतना (जीव) अपने मूल स्वरूप का दर्शन करके आत्मज्ञानी बन जाता है । इसे विदेह अवस्था भी कहते हैं । इस अवस्था के फलस्वरूप जीव अपने शरीर की क्रियाओं से ऊपर उठ जाता है, अर्थात् वह सुख-दुःख से विचलित हुए बिना दृष्टा होकर संसार की क्रियाओं को देखता है ।

वैसे तो अनेक ऋषियों ने इस अवस्था को प्राप्त किया है, परन्तु राजा जनक का नाम अधिक प्रसिद्ध है ।

सृष्टि के आदि, मध्य और वर्तमान में सबने यही कहा है कि उन्होंने परब्रह्म को नहीं देखा । कैवल्य (विदेह) अवस्था को प्राप्त अनेक लोग हो गए, परन्तु वे भी परमात्मा के विषय में कुछ नहीं बता सके ।1



(1) कलस हिन्दुस्तानी 2/11