कलियुग
चारों युगों में अन्तिम युग को कलियुग कहते हैं ।
परमतत्व के सन्दर्भ में इस संसार की अज्ञानता को कलियुग कहते हैं । इसे माया भी कहते हैं । सारा संसार इसके अधीन होकर भटका हुआ है ।
कलियुग रूपी दैत्य
देखो यह दैत्य (कलियुग) ऐसा शक्तिशाली है कि पूरे विराट (ब्रह्माण्ड) में व्यापक है । (उसके प्रभाव से) सब लोग काम, क्रोध और अहंकार लेकर उल्टी राह पर चल रहे हैं ।1
जब (जाग्रत बुद्धि) दैत्य कलिंगा (कलियुग रूपी अज्ञान) को मारेगी, तब तत्काल सब कुछ सीधा हो जाएगा । वह हमारी (ब्रह्मसृष्टियों की) लीला का परिचय देकर संसार को यम के जाल से मुक्त करवा देगी ।2
(जाग्रत बुद्धि) एक शब्द की मार से इसका संहार कर देगी । एक पल भी नहीं लगेगा । चौदह लोक में इस बुद्धि के शब्द (ज्ञान) की महिमा फैल जाएगी ।3
मै (इन्द्रावती) इसे तो मारूं यदि इसमें कोई बल हो । यह तो एक अक्षर की मार भी सहन नहीं कर सकता । मेरी बुद्धि के एक शब्द से तो ऐसे करोड़ों (कलियुग) मर सकते हैं ।4
(1) कलस हिन्दुस्तानी 18/28 (2) कलस हि. 18/27 (3) कलस हि. 18/29 (4) कलस हि. 18/31
