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प्रकृति | Prakriti

यह संसार प्रकृति का विस्तृत रूप है । प्रकृति को माया भी कहते हैं ।

प्रकृति दो प्रकार की है- जड़ और चेतन ।

मूल प्रकृति

अक्षर की इच्छा से ही क्षर ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और प्रलय होता है ।

ब्रह्म की इच्छा को ही मूल प्रकृति कहते हैं ।1

इस प्रकार आप (अक्षर) अपनी इच्छानुसार प्रकृति से कई विध से खेलते हैं ।2



(1) प्रकास हिन्दुस्तानी 37/15 (2) प्रकास हि. 37/17