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श्री देवचन्द्र जी का जन्म

श्री प्राणनाथ लीलामृत - प्रसंग २

विक्रम सम्वत् १६३८ में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मारवाड़ प्रान्त के उमरकोट गांव (गुजरात) में श्री देवचन्द्र जी का जन्म हुआ । उनके पिता का नाम मत्तू मेहता और माता का नाम कुंवरबाई था । जब श्री देवचन्द्र जी का जन्म हुआ, तो उनके परिवार और सगे-सम्बन्धियों को बहुत अधिक आनन्द हुआ ।

श्री देवचन्द्र जी के तन में परब्रह्म की आनन्द स्वरूपा श्री श्यामा जी की आत्मा ने प्रवेश किया । संसार के लोग तो अक्षर के बारे में ही पढ़ते हैं, जबकि श्यामा जी तो अक्षर से भी परे साक्षात् अक्षरातीत की आनन्द स्वरूपा हैं । उनके प्रकट होने की बधाई ब्रह्मा, विष्णु, शिव सहित समस्त ब्रह्माण्ड के लिए है, क्योंकि उनकी कृपा से सभी प्राणियों को अखण्ड मुक्ति और अलौकिक सुख प्राप्त होगा ।

भविष्य पुराण में कहा गया है कि जब पृथ्वी पर मुसलमानों का राज्य होगा, उस समय औरंगज़ेब के शासन काल में बुद्ध कल्की अवतार का प्रकटन होगा । उनके अन्दर परब्रह्म की शक्ति विराजमान होगी और उनके द्वारा धर्म की रक्षा होगी ।

कतेब ग्रन्थों में भी १२० वर्षों तक जागनी लीला की भविष्यवाणी की गई है । यह सम्वत् १६३८ से १७५८ की ओर संकेत करता है जिसमें श्री देवचन्द्र जी, श्री मेहेराज और श्री छत्रसाल के तनों से लीला हुई । यह भी लिखा है कि इस दौरान अखण्ड परमधाम का गोपनीय ज्ञान प्रकट होगा और सारी सृष्टि इन दोनों सरूपों के चरणों में नतमस्तक होगी ।

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