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विषय-सूची

श्री प्राणनाथ लीलामृत

Prannath Leelaamrit in hindi

बीतक ग्रन्थ में परमेश्वर प्राणनाथ द्वारा कलियुग में संसार में आने और अलौकिक तारतम ज्ञान प्रकट करने की लीला का विस्तृत वर्णन है, जो चौपाई शैली में सत्रहवीं शताब्दी के अन्त में लिखा गया था । सुगमता के लिए उसका संक्षिप्त गद्य रूपान्तरण करके श्री प्राणनाथ लीलामृत नामक यह ग्रन्थ तैयार किया गया है, जिसकी रचना गरीब दास ने की है ।

विषय सूची

  1. परब्रह्म का संसार में आने का कारण
  2. श्री देवचन्द्र जी का जन्म
  3. परब्रह्म के विषय में जिज्ञासा
  4. गृह त्याग एवं मार्ग में दर्शन
  5. कच्छ में खोज
  6. राधा-वल्लभी मार्ग में दीक्षा
  7. विष से बचाने वाला मन्त्र
  8. निष्ठाबद्ध गोपनीय सेवा
  9. बाल मुकुन्द की मूर्ति अदृश्य हो गई
  10. घर पर बांके बिहारी के वस्त्रों की सेवा
  11. चितवन में दर्शन
  12. नवतनपुरी में भागवत कथा श्रवण
  13. पौराणिक परम्पराओं की निरर्थकता
  14. अन्तिम परीक्षा
  15. श्री राज का साक्षात्कार
  16. गांगजी भाई को प्रबोध
  17. सुन्दरसाथ आगमन
  18. श्री देवचन्द्र द्वारा अलौकिक ज्ञान चर्चा
  19. श्री मेहेराज का लौकिक परिचय
  20. दोनों स्वरूपों का मिलाप
  21. आड़िका लीलाएं
  22. सद्गुरु का सान्निध्य लाभ
  23. कान्हजी भट्ट से शास्त्रार्थ
  24. श्री मेहेराज द्वारा कसनी
  25. अरब में खेता भाई से भेंट
  26. सुल्तान से फरियाद
  27. सद्गुरु से अलगाव
  28. धनी श्री देवचन्द्र जी का बुलावा
  29. श्री देवचन्द्र जी का अन्तर्धान
  30. बिहारी जी का गादी अभिषेक
  31. श्री मेहेराज द्वारा परमधाम की चर्चा
  32. सुन्दरसाथ की सेवा की इच्छा
  33. युगल स्वरूप का साक्षात्कार
  34. बिहारी जी द्वारा वाणी पर प्रतिबन्ध
  35. हरजी व्यास का प्रसंग
  36. सुन्दरसाथ पर संकट
  37. जयराम भाई की जागनी
  38. दीव बंदर में उद्बोध
  39. ब्रह्ममुनियों की रक्षा
  40. श्री तेज कुंवरी का अपहरण
  41. ठट्ठानगर में जागनी हेतु नाव का वापस लौटना
  42. चिन्तामणि बोध
  43. लालदास जी का श्री जी से मिलाप
  44. मस्कत बन्दर वृत्तान्त
  45. महावजी भाई की जागनी
  46. अब्बास बन्दर वृत्तान्त
  47. भैरों ठक्कर की जागनी
  48. तेजबाई और उनकी सखियों की निष्ठा
  49. अब्बास बंदर से भावपूर्ण विदाई
  50. ठट्ठानगर पुनः आगमन
  51. धारा भाई प्रसंग
  52. नलिया में श्री जी और बिहारी जी की भेंट
  53. दोनों स्वरूपों में मत वैभिन्य
  54. खम्भालिया के राजा से रक्षा
  55. शिवजी और रामजी का वृत्तान्त
  56. सूरत में भीम भाई की जागनी
  57. गोविन्द व्यास के ४० प्रश्नों का उत्तर
  58. बिहारी जी द्वारा श्री जी का निष्कासन
  59. लालदास जी की माया से निवृत्ति
  60. सूरत से प्रस्थान
  61. सिद्धपुर में केशवदास की जागनी
  62. मेड़ता की बीतक
  63. कतेब की पूंजी
  64. दिल्ली आगमन
  65. लक्ष्मी दास पर हांसी
  66. दिल्ली में जुड़ने वाले सुन्दरसाथ
  67. शाहजहांपुर बूड़िया का वृत्तान्त
  68. हरिद्वार का महाकुम्भ
  69. रामानुज सम्प्रदाय के आचार्यों से वार्ता
  70. नीमानुज सम्प्रदाय के आचार्यों से संवाद
  71. विष्णु श्याम सम्प्रदाय के आचार्यों से वार्ता
  72. माध्व सम्प्रदाय के आचार्यों से संवाद
  73. दस नाम सन्यासी की विधि
  74. षट् दर्शन की विधि
  75. न्याय दर्शन के आचार्यों से संवाद
  76. मीमांसा दर्शन के आचार्यों से वार्ता
  77. सांख्य दर्शन के आचार्यों से संवाद
  78. वैशेषिक दर्शन के आचार्यों से वार्ता
  79. योग दर्शन के आचार्यों से चर्चा
  80. वेदान्त दर्शन के आचार्यों से शास्त्रार्थ
  81. श्री जी से प्रश्नोत्तर
  82. श्री निजानन्द सम्प्रदाय की पद्धति
  83. शेख सुलेमान को पैगाम
  84. लालदास और गोवर्धन भाई में मतभेद
  85. सनन्ध का अवतरण
  86. फारसी भाषा में पत्र तैयार किए
  87. कतेब साहित्य में प्रमाण मिले
  88. बिहारी जी द्वारा भेजे सुन्दरसाथ का हृदय परिवर्तन
  89. नलुओं का वृत्तान्त
  90. बाग में मंत्रणा
  91. रुक्का प्रसंग
  92. श्री जी से बड़े अभियान के लिए आज्ञा मिली
  93. बारह मोमिन
  94. मोमिनों की औरंगज़ेब से भेंट
  95. औरंगज़ेब ने मोमिनों को कैद में डाला
  96. अवज्ञाकारियों पर रोष
  97. श्री जी द्वारा मोमिनों को पत्री
  98. मोमिनों की काज़ी शेख इस्लाम से वार्ता
  99. छोटी पत्री
  100. दिल्ली से उदयपुर आए
  101. उदयपुर में जागनी
  102. दिल्ली से मोमिन वापस लौटे
  103. राणा को पहचान न हो सकी
  104. उदयपुर पर औरंगज़ेब का आक्रमण
  105. श्री जी साहिब का वैरागी भेष
  106. दुधलाई ग्राम का प्रसंग
  107. मन्दसौर आगमन
  108. कुरान का अनुवाद
  109. राजा भाव सिंह से मुकुन्द दास की भेंट
  110. श्री जी ने भिक्षा में मिला भोजन ग्रहण किया
  111. उज्जैन की बीतक
  112. औरंगाबाद वृत्तान्त
  113. मुस्लिम अधिकारियों को समझाने की शर्त
  114. दज्जाल से लड़ाई
  115. लालदास जी की शेख इस्लाम से वार्ता
  116. लालदास जी की अब्दुल रहमान से भेंट
  117. आकोट की बीतक
  118. शुक्राना
  119. ब्राह्मण की सुरता अखण्ड धाम पहुंची
  120. आकोट से प्रस्थान
  121. रामनगर वृत्तान्त
  122. महामारी का प्रकोप
  123. रामनगर में सेवा के साथी
  124. औरंगज़ेब ने श्री प्राणनाथ के पीछे सेना भेजी
  125. रामनगर के राजा की अश्रद्धा
  126. बाग में सैनिकों से संघर्ष
  127. गढ़ा की बीतक
  128. अमराई घाट पर श्री प्राणनाथ के चरण पड़े
  129. श्री प्राणनाथ व छत्रसाल जी की भेंट
  130. चौपड़ा हवेली में युगल स्वरूप को पधराया
  131. महाराज छत्रसाल को कतेब पक्ष से अवगत कराया
  132. महोबा के काज़ी की चुनौती
  133. पण्डितों से शास्त्रार्थ
  134. महाराज छत्रसाल की सेवा भावना
  135. पुरदल खान की पाती का उत्तर
  136. महाराज छत्रसाल को विजय का वरदान
  137. पन्ना की बीतक
  138. श्री जी की आठ प्रहर की वृत्त
  139. गुम्मट मन्दिर में श्री प्राणनाथ को पधराया
  140. पांचवे दिन की लीला को विराम

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